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आज के दिन ही अमरीश पूरी ने दुनिया को अलविदा कहा था जानिए उनकी जिन्दगी से जुड़े रोचक किस्से

आज के दिन ही मोकम्बो खामोश हो गया था 400 से ज्यादा फिल्मो में अहम भूमिका निभाने वाले हिंदी सिनेमा के महान कलाकार अमिरिश पूरी जी की आज पून्य तिथि हैं . अमरीश पूरी फिल्मो में नेगेटिव रोल ज्यादा करते थे लेकिन असल जिन्दगी में वो बेहद शांत और सीधे थे जानिए उनकी जिन्दगी से जुड़े खास किस्से –

अमरीश पूरी दुनिया में नही हैं लेकिन लोगो के दिलो में जिन्दा हैं –

आज के दिन ही आज से ठीक 13 साल पहले अमरीश पूरी जी ने दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन पुरे 2017 साल में अमरीश पूरी जी सोशल मीडिया और लोगो के दिलो पर छाये रहे उनकी एक फिल्म के डायलोग पर लाखो मीम बनाये गये जिन्हें लोगो ने दिल खोलकर शेयर किया डायलोग था आओ कभी हवेली पर . अमिरिश पूरी आज हमारे बीच नही हैं लेकिन उनकी कलाकारी का जादू आज भी लोगो के दिलो में जिन्दा हैं . अगर मैं अपने शब्दों में कहूँ तो वो मरे नही अमर हो गये हैं और हमेशा हमारे दिलो में जिन्दा रहेगा .

फिल्मो में गुंडे बनते थे लेकिन असल जिन्दगी में बहुत सरीफ थे –

अमरीश पूरी ने लगभग 400 से ज्यादा फिल्मो में काम किया उनकी फ़िल्मी दुनिया में छवि एक नेगेटिव किरदार की थी लोग फिल्मो में उन्हें एक ऐसे किरदार में देखते थे जिसकी हरकते देख सबकी रूह काँप जाये लेकिन असल जिन्दगी में वो बिलकुल अलग थे . एक बार उनसे एक इंटरव्यू के दोरान पूछा गया की आप फिल्मो में गुंडों का और नेगेटिव किरदार निभाते हो लेकिन क्या असल जिन्दगी में इसका कुछ असर हैं . उनका जवाब दिल को छूने वाला था उन्होंने बहुत ही शालीन तरीके से जवाब दिया की मेने आज तक किसी को थपड तक नही मारा . मै लोगो के मनोरजन के लिए किरदार निभाता हूँ मैं भी एक आम इंसान और सरीफ इंसान हूँ .

सिमरन जा जीले अपनी जिन्दगी –

अमरीश पुरी ने सदी की सबसे बड़ी फिल्मों में कार्य किया। उनके द्वारा शाहरुख खान की हिट फिल्म “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” में निभाये गए “बाबूजी” के किरदार की प्रशंसा सर्वत्र की जाती है। उन्होंने मुख्यतः फिल्मो मे विलेन का पात्र निभाते देखा गया है। इस फिम से अमरीश पूरी को अलग पहचान मिली थी जो शदियों तक दोहराई जायेगी .

मोगाम्बो खुश हुआ –

अमरीश पूरी जी की 1987 में बनी अनिल कपूर की मिस्टर इंडिया में उन्होंने “मोगाम्बो” का किरदार निभाया जो कि फिल्म का मुख्य विलेन है। इसी फिल्म में अमरीश जी का डायलॉग “मोगाम्बो खुश हुआ” फिल्म-जगत मे विख्यात है। इस फिल्म में मोगाम्बो का किरदार लोगो की जुबां पर आज भी हैं और हमेशा रहेगा

अमरीश पूरी जी की जिन्दगी एक नजर में –

अमरीश पूरी जी का जन्म 22 जून 1932 को हुआ अमरीश पुरी हिन्दी फिल्मों की दुनिया का एक प्रमुख स्तंभ रहे हैं। अभिनेता के रूप निशांत, मंथन और भूमिका जैसी फ़िल्मों से अपनी पहचान बनाने वाले श्री पुरी ने बाद में खलनायक के रूप में काफी प्रसिद्धी पायी। उन्होंने १९८४ मे बनी स्टीवेन स्पीलबर्ग की फ़िल्म “इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ़ डूम” (अंग्रेज़ी- Indiana Jones and the Temple of Doom) में मोलाराम की भूमिका निभाई जो काफ़ी चर्चित रही। इस भूमिका का ऐसा असर हुआ कि उन्होंने हमेशा अपना सिर मुँडा कर रहने का फ़ैसला किया। इस कारण खलनायक की भूमिका भी उन्हें काफ़ी मिली। व्यवसायिक फिल्मों में प्रमुखता से काम करने के बावज़ूद समांतर या अलग हट कर बनने वाली फ़िल्मों के प्रति उनका प्रेम बना रहा और वे इस तरह की फ़िल्मों से भी जुड़े रहे। फिर आया खलनायक की भूमिकाओं से हटकर चरित्र अभिनेता की भूमिकाओं वाले अमरीश पुरी का दौर। और इस दौर में भी उन्होंने अपनी अभिनय कला का जादू कम नहीं होने दिया

आज के दिन ही आज से 13 साल पहले अमरीश पूरी जी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था 






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