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वो वीर शहीद जवान जिन्होंने अपनी जान देकर संसद भवन और देश के बड़े बड़े नेताओ को बचाया

आज हम नम आँखों से उन वीर शहीदों की शहादत को याद करेंगे जिन्होंने अपनी जान देकर 200 से ज्यादा नेताओ और लोकतंत्र के मन्दिर संसद भवन को बचाया . उस दिन अचानक ससंद भवन पर हमला हो गया और उस समय ससंद भवन में  लालकृष्ण आडवाणी अपने कई साथी मंत्रियों और लगभग 200 नेता  मौजूद थे. पढिये पूरी कहानी केसे वीर जवानो ने अपनी  जान देकर सबकी जान बचाई

ससंद हमले की पूरी कहानी – 

तारी‍ख 13 दिसंबर, सन 2001, स्थान- भारत का संसद भवन। लोकतंत्र का मंदिर जहां जनता द्वारा चुने सांसद भारत की नीति-नियमों का निर्माण करते हैं। आम दिनों में जब संसद भवन के परिसर कोई सफेद रंग की एंबेसेडर आती है तो कोई ध्यान नहीं देता, लेकिन उस दिन उस सफेद रंग की एंबेसेडर ने कोहराम मचा दिया।
संसद भवन के परिसर में अचानक गृह मंत्रालय का कार पास लगी एक सफेद एंबेसेडर से आए 5 आतंकवादियों ने 45 मिनट तक लोकतंत्र के इस मंदिर पर गोलियों-बमों से थर्रा कर रख दिया था। आतंक के नापाक कदम उस दिन लोकतंत्र के मंदिर की दहलीज तक पहुंच गए थे। अचानक हुए हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।

200 से ज्यादा नेता हमले के समय ससंद भवन में थे –

संसद के शीतकालीन सत्र की सरगर्मियां तेज़ थीं. विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही 40 मिनट के लिए स्थगित की जा चुकी थी. सदन स्थगित होते ही प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी लोकसभा से निकल कर अपने-अपने सरकारी निवास के लिए कूच कर चके थे. बहुत से सांसद भी वहां से जा चुके थे. पर गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी अपने कई साथी मंत्रियों और लगभग 200 सांसदों के साथ अब भी लोकसभा में ही मौजूद थे.

एक एंबेस्डर कार में आये थे 5 आतंकवादी –

 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार – उपराष्ट्रपति कृष्णकांत शर्मा के कार के काफिले में तैनात सुरक्षार्मी अब सदन से उनके बाहर आने का इंतज़ार कर रहे थे. और ठीक उसी पल, एक सफेद एंबेस्डर कार तेज़ी से उप राष्ट्रपति के काफिले की तरफ बढ़ती है. संसद भवन के अंदर आने वाली गाड़ियों की तय रफ्तार से इसकी रफ्तार कहीं ज्यादा तेज थी.कोई कुछ समझ ही पाता कि कार के पीछे लोकसभा के सुरक्षा कर्मचारी जगदीश यादव भागते नजर आए. वो लगातार कार को रुकने का इशारा कर रहे थे. जगदीश यादव को यूं बेतहाशा भागते देख उपराष्ट्रपति के सुरक्षाकर्मी एएसआई जीत राम, एएसआई नानक चंद और एएसआई श्याम सिंह भी अंबेस्डर कार को रोकने की कोशिश में उसकी तरफ झपटते हैं.सुरक्षाकर्मियों को अपनी ओर आता देख एंबेस्डर कार का ड्राइवर अपनी गाड़ी को गेट नंबर एक की तरफ मोड़ देता है. गेट नंबर एक के नजदीक ही उप-राष्ट्रपति की कार खड़ी थी. तेज रफ्तार और मोड़ की वजह से कार का ड्राइवर नियंत्रण खो देता है और गाड़ी सीधे उपराष्ट्रपति की कार से जा टकराती है.

कैसे अपनी जान देकर बचाया नेताओ और ससंद भवन को –

सफेद गाडी से 5 आतंवादी निकलते है और हथियारों से लेस वो धडाधड गोलिया चलाना शुरू कर देते है लेकिन वीर जवानो ने ससंद भवन और नेताओ की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और उन आतंकवादियो से भीड़ गये . फायरिंग होती रही और आतंकवादी जवानो के होस्नले देख हडबडा गये और इधर उधर गोलिया चलाने लग गये . इसी बीच जवानो ने अपनी जान पर खेलकर नेताओ को सुरक्षित जगह पर पहुचाया . जिसमे 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकी हमले में संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 लोग शहीद हुए थे. 15 साल पहले  संसद पर आतंकी हमला हुआ था. जवानो की वीरता के चलते ही उन पांचो आतंकवादियो को मार गिराया गया . एक आतंकवादी ने तो खुद को बम से उडा लिया था .

ससंद हमले में अफजल को फांसी –

 

देश को हिला के रख देने वाले ससंद हमले की घिनौनी साजिश रचने वाले मुख्य आरोपी अफजल गुरु को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। संसद पर हमले की साजिश रचने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2005 को अफजल गुरु को फांसी की सजा सुनाई थी।
कोर्ट ने आदेश दिया था कि 20 अक्टूबर 2006 को अफजल को फांसी के तख्ते पर लटका दिया जाए। तीन अक्टूबर 2006 को अफजल की पत्नी तब्बसुम ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दाखिल कर दी।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अफजल की दया याचिका खारिज कर दी और सरकार ने उसे फांसी देकर हमले में शहीद हुए बहादुरों को सही मायने में श्रद्धांजलि दी थी 






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