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हरियाणा के मंत्री चंडीगढ़ की कोठी नम्बर 79 क्यों नही लेना चाहते ? जानिये 79 नम्बर कोठी के पीछे का अन्धविवास

हरियाणा सरकार के मंत्रियों के लिए चंडीगढ़ में एक कोठी ऐसी है, जिसकी दहशत ने उन्हें परेशान कर रखा है। इस कोठी में आज तक जो भी मंत्री रहा, उसके बाद अगला चुनाव नहीं जीत पाया. आपको बता दे की चंडीगढ़ के सेक्टर सात में स्थित इस कोठी का नंबर 79 है. मंत्री इस कोठी को लेने में रूचि नही दिखा रहे हैं.

क्या हैं कोठी नम्बर 79 का इतिहास क्यों डर रहे हैं मंत्री ?

मंत्रियों का मानना हैं की जो इस कोठी में रहता हैं वो अगला चुनाव नही जीत पाता हैं. आपको बता दे की 1987 में सुषमा स्वराज रहती थी, लेकिन वे अपना अगला चुनाव हार गई। 1991 में भजनलाल की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रही करतार देवी को यह कोठी अलाट हुई मगर वे भी अगला चुनाव नहीं जीत पाई। बंसीलाल की सरकार में बहादुर सिंह को 1996 में 79 नंबर कोठी मिली मगर बहादुर सिंह भी चुनाव हार गए। 1999 में प्रो. रामबिलास शर्मा को 79 नंबर कोठी अलाट की गई मगर शर्मा भी चुनाव नहीं जीत सके.

अब यही डर सभी मंत्रियों का सता रहा हैं की जो इस कोठी में रहेगा वो चुनाव हार जाएगा. आपको बता दे की अभी फ़िलहाल मंत्री मूलचंद शर्मा को अब चंडीगढ़ सेक्टर सात में कोठी नंबर 75, मंत्री रणजीत सिंह को सेक्टर तीन में कोठी नंबर 32, मंत्री ओमप्रकाश यादव को कोठी नंबर 68, मंत्री कमलेश ढांडा को कोठी नंबर 73, मंत्री अनुप धानक को कोठी नंबर 76, मंत्री संदीप सिंह को कोठी नंबर 72 व मंत्री जय प्रकाश दलाल को सेक्टर 16 में केाठी नंबर 239 अलॉट कर दी गई है। मुख्य सचिव कार्यालय से मंत्रियों को कोठियां अलॉटमेंट संबंधी निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.






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